प्रदीप कुमार की कहानी । कहानी मेरे सपनों के सच होने की
एक कहावत है अंधविश्वास से संचालित मन भयभीत होता है और भयभीत अपना आधा बल खो देता है इसी प्रकार के अंधविश्वास के चलते बिजनेस के प्रति लोग भयभीत रहते हैं और पढ़े लिखे होने के बावजूद बिजनेस करने से कतराते हैं शायद यही वह कारण है कि हम आबादी में चीन के बहुत करीब भले ही हो पर आर्थिक और औद्योगिक की के तरक्की मामले में बहुत पीछे हैं। हम किसान कामगार की श्रेणी से बाहर नहीं निकल पाए हैं। अगर अपनी तरक्की के साथ-साथ देश को आर्थिक तरक्की देनी है तो हमें बिजनेस करने वाला बनना होगा। मुझे खुशी है कि मैं एक ऐसी कंपनी के साथ जुड़ कर बिजनेस कर रहे हू। जिसने अब तक लाखों लोगों को सफल बिजनेस का अवसर प्रदान कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है।सुख तथा समृद्धि के साथ जीवन जीने की कला सिखाई जाती है।
यह कहना झूसी इलाहाबाद के रहने वाले प्रदीप कुमार का। दीप कुमार अपनी कहानी सुनाते हुए कहते हैं कि ग्लेज के साथ बिजनेस शुरू करने से पहले मैं इंजीनियरिंग की की पढ़ाई कर रहा था मेरी तमन्ना यह थी। पढ़ाई के साथ साथ ही मैं कोई ऐसा काम करूं जिससे मैं अपना खर्चा खुद का उठा सकू और अपने परिवार का भी कुछ मदद कर सकूं अपनी इस तमन्ना को पूरा करने के लिए मैंने कई प्रकार के कामों के बारे में जानकारी प्राप्त की। पर मुझे कोई ऐसा काम नहीं मिल पाया। जिससे मैं वक्त और पैसे की आजादी हासिल कर पाता।
प्रदीप कुमार अपने बीते हुए दिनों को याद करते हुए कहते हैं,''अचानक एक दिन मेरी मुलाकात अजय जी से हुई दरअसल अजय जी मेरे रूम पार्टनर के दोस्त थे। हुआ उस दिन अपने दोस्त से ही मिलने आए थे। तभी उनसे मेरी भी मुलाकात हो गई। उनके मिलनसार स्वभाव और प्रेरक बातों से बहुत जल्दी मुझे आकर्षित कर दिया। और धीरे-धीरे वह मेरे गहरे दोस्त बन गए।
अजय से दोस्ती होने के बाद मैं अक्सर अपने भविष्य के बारे में उनसे चर्चा किया करता था। सच कहूं तो मैं अपने भविष्य को लेकर बहुत आशंकित था। इसका कारण लिया था कि अभी कुछ दिन पहले मेरे परिवार में एक दुखद घटना हुई थी। मेरे बड़े भाई महाराष्ट्र में काम किया करते थे एक दिन अचानक उनकी तबीयत खराब हुई और मौत हो गई। भाई की असामयिक मौत होने से मेरा परिवार पूरी तरह से टूट गया। पिताजी को इस दुख से इतना गहरा धक्का लगा कि उन्होंने नौकरी छोड़ दी। पिताजी के नौकरी छोड़ने के बाद मुझ पर बहुत ज्यादा दबाव आ गया था।
के नौकरी छोड़ने के बाद मुझ पर बहुत ज्यादा दबाव आ गया था।
इसलिए मैं पैसे कमाने की चिंता में डूब गया। अजय जी से मेरी बस यही चर्चा होती थी कि ऐसा कौन सा काम किया जाए जिससे कम से कम खर्च और आमदनी ज्यादा हो।मैं नहीं जानता था अजय जी को मेरी इस तरह की बातें कितनी पसंद आती थी, किंतु इतना जरूर था कि वह मेरी बातों को सुनकर बोर नहीं होते थे और मुझे अवसासन दे देते थे। की अगर किसी दिन इस तरह के काम की जानकारी मिली तो मुझे जरूर देंगे।।
और सच में 1 दिन ऐसा ही हो गया अजय जी के किसी मित्र ने उन्हें दिल्ली के प्रमुख कंपनी, glaze trading India private limited द्वारा जाने वाले एक बेहतरीन बिजनेस के बारे में बताया गया उसी दोस्त ने अजय जी को ग्लेज का बिजनेस प्रेजेंटेशन भी दिखाओ आया बिजनेस प्रेजेंटेशन देखने के बाद जब अजय जी को बिजनेस पसंद आया तो उन्होंने बिना कोई देरी किए बिजनेस आरंभ कर दिया बिजनेस शुरू करने के बाद वह मेरे पास आ गए। उन्होंने मुझे बताया कि वह जो बिजनेस कर रहे हैं। इसे कम पूंजी में शुरू कर इससे अच्छी कमाई की जा सकती है। उन्होंने मुझसे कहा कि तुम जिस तरह के बिजनेस की चर्चा की चर्चा मुझसे अक्सर किया करते थे। यह बिजनेस ठीक उसी प्रकार का है। मेरी मानो तो तुम भी इस बिजनेस को बिना देर लगाए शुरू कर दो।मेहनत और धैर्य के साथ जब तुम इस बिजनेस को करोगे तो तुम्हारी जिंदगी भी बदलते देर नहीं लगेगी। मैं खुश हो गया। मैंने अजय जी से कहा कि आप मुझे बिजनेस के बारे में बताओ जानकारी दो कि मैं यह बिजनेस को कैसे शुरू कर सकता हूं।
प्रदीप कुमार आगे कहते हैं,
मेरे अनुरोध पर अजय जी ने मुझे ग्लेज का बिजनेस प्रेजेंटेशन दिखाया बिजनेस प्रेजेंटेशन देखने के बाद मुझे महसूस हुआ कि यह वही बिजनेस है। जिसकी तलाश मुझे सालों से थी। बिजनेस ऐसा था कि पार्ट टाइम करते हुए मैं अपनी पढ़ाई को भी जारी रख सकता था। और घर की आर्थिक स्थिति में भी मदद कर सकता था। मैंने मैंने तुरंत बिजनेस करने का फैसला कर लिया। मेरी उम्र उस समय मात्र 19 साल की थी। मैं आपको बता नहीं सकता कि जिस समय मेरी उम्र बिजनेस शुरू करने का फैसला किया। उस वक्त मुझे कितनी ज्यादा खुशी मिली थीं। पर इस खुशी को जिंदगी भर बरकरार रखने के लिए मुझे धैर्य और लगन से मेहनत करनी थी। और सफलता प्राप्त करनी थी।
प्रदीप कुमार अपनी पत्नी और अपने बच्चों के गैलवे बिजनेस में कामयाब होने की खुशी मना रहे हैं।
प्रदीप कुमार कहते है।,
किसी भी बिजनेस में सफल बनाने के लिए उस बिजनेस से संबंधित ट्रेनिंग लेना आवश्यक होता है। मैंने भी अपनी गैलरी शॉप खोलने के बाद बिजनेस और प्रोडक्ट के संबंधित ट्रेनिंग तल्लीनता के साथ ली। मुझे ट्रेनिंग में बताया गया था। प्रोडक्ट की रिटेलिंग करने से पहले प्रोडक्ट का खुद इस्तेमाल करना जरूरी है। ऐसा इसलिए जरूरी है ताकि आपको प्रोडक्ट की क्वालिटी और उन्हें उपयोग करने के तरीके को अच्छी तरह से पता चल जाए। जब आपको प्रोडक्ट की खासियत प्रयोग करने के तरीकों का पता चलेगा तभी आप ग्राहकों के पास जाकर पूरे विश्वास के साथ प्रोडक्ट का प्रदर्शन कर सकोगे।
मैंने अपने गैलवे शॉप के लिए आक्सिडेंट माइक्रो वास liquid dishwash coconut oil इत्यादि प्रोडक्ट खरीदे थे।उनमें से एक प्रोडक्ट Galway rupabham पपाया फेयरनेस फेस वॉश भी था उस वक्त मेरे चेहरे पर बहुत सारे पिंपल्स थे। मैंने उसे ठीक करने के लिए कई प्रकार की क्रीम लगाई को आजमाया था मुझे कोई फायदा नहीं मिला था। मैंने जब पपाया फेयरनेस फेस वॉश इस्तेमाल करना शुरू किया तो मुझे बहुत अच्छा परिणाम मिला मेरे चेहरे की रंगत निखरी सारे पिंपल भी खत्म हो गया। कुछ ही दिनों में दाग कम हो गए। इससे मेरे आत्मविश्वास मैं बढ़ोतरी तो हुई मेरा प्रोडक्ट के प्रति भरोसा भी बढ़ गया। मुझे यकीन हो गया इतने अच्छे प्रोडक्ट ग्राहक हाथों-हाथ स्वीकार करेंगे और मुझे रिटेलिंग से अच्छा मुनाफा होने लगेगा। मुझे झिझक थी तो इस बात की कि अगर मैं रिटेलिंग करने के लिए निकला तो मेरे जान पहचान के लोग मुझे क्या कहेंगे।
इसी झिझक के चलते मैं कई दिनों तक प्रोडक्ट रिटेल करने का फैसला नहीं कर सका।
प्रदीप कुमार कहते है।
दरअसल मन किया झिझक एक ऐसा व्यवधान होती हैं।, जिस पर पाए बिना आगे नहीं बढ़ा जा सकता। मुझे भी इस झिझक पार पान आवश्यक था। एक दिन मैं अपना मन कड़ा कर लिया।मन को आवाज दी कि अगर तुम भूखे हो तो तुम्हारे मुंह में कोई रोटी का टुकड़ा नहीं डालने आयेगा। इसके लिए तुम्हें खुद रोटी जुटानी पड़ेगी। और खानी पड़ेगी जब तुम्हें कोई खिलाने नहीं आ सकता तो तो तुम दूसरों की चिंता कर अपनी रोटी क्यों गांवा रहे हो। मेरे मन की इस आवाज ने मेरे हौसला को भर दिया मैं उसी दिन एक बैग में प्रोडक्ट को वारकरी टेलिंग के लिए निकल पड़ा जैसे कि आपको मालूम है डायरेक्ट सेलिंग के व्यवसाय में आपको अपने प्रोडक्ट को ग्राहकों सीधे बेचना होता है। आप ग्राहको के पास जाते हैं। उन्हें अपना प्रोडक्ट दिखा कर इनकी खूबी बताते हैं। अगर आपके प्रोडक्ट ग्राहकों को पसंद आते हैं, तब आप उन्हें बेचते है। मैंने भी ऐसा करना शुरू कर दिया। मैं सबसे पहले ग्राहकों से मिलने का समय लेता। उनके पास जाता और प्रोडक्ट की क्वालिटी बताकर उन्हें समझाता कि यह प्रोडक्ट आपके लिए क्यों उपयोग है। अगर ग्राहक कहते कि पहले से ही वह दूसरी कंपनी के इस तरह के प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे है।तो मैं उनको कहता की आप एक बार मेरा प्रोडक्ट इस्तेमाल करके देख लो। अगर मेरे प्रोडक्ट आपके उपयोग किए जाने प्रोडक्ट से बेहतर हो, तभी इन्हें खरीदना। मेरी इस प्रकार की बात को ग्राहक मान लेते तो उनकी क्वालिटी के चलते नियमित ग्राहक बन जाते। इसी प्रकार से मेरे सैकड़ों ग्राहक बने और रिटेलिंग से अच्छा मुझे रिटेल मुनाफा भी मिला।
वह कहते हैं, मैंने टीम बनाने के लिए अपने सीनियर के साथ बैठकर ट्रेनिंग में बताये गए तरीके से लिस्ट बनाई। उस लिस्ट के अनुसार ही मैंने लोगों को बिजनेस प्रेजेंटेशन देखने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने टीम बनाने की शुरुआत सबसे पहले अपने घर से की। अपनी पत्नी, छोटे भाई, साडू, साले ,मामा, और उनके लड़के चाचा को अपनी गैलवे शॉप की फ्रेंचाइजी दी। आज इन लोगों के साथ ऐसे लोगों की तादाद हजारों में है। जो मेरे द्वारा दिए गए बिजनेस प्रस्ताव सफल बिजनेसमैन बन चुके।
मै खुद आज ग्लोबल डॉयमंड डिस्टीब्यूटर की रैक पर हूं।लाखों रुपए महीने की कमाई है बिजनेस के बल पर धन दौलत शोहरत सबकुछ हासिल कर लिया है। मुझे अपने ऊपर गर्व है कि मैंने अपनी मेहनत से अपने सपने को सच कर लिया।
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